चुनाव 2019 : TMC का इंटरनल एनालिसिस: बंगाल में लेफ्ट का वोट BJP को हो सकता है शिफ्ट

नई दिल्लीः महान दार्शनिक, समाजसुधारक और लेखक ईश्वरचंद विद्यासागर अपने जन्म के 119 साल बाद फिर बंगाल में एक चुनावी मुद्दा बन गए हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कोलकाता कॉलेज में उनकी मूर्ति तोड़े को मुद्दा बनाकर शिक्षित वामपंथी और मध्यम वर्गीय वोट बैंक तक जाने की कोशिश कर रही है। टीएमसी की आंतरिक रिपोर्ट और प्रतिक्रिया से पता चलता है कि 2014 के आम चुनाव में लेफ्ट को जो 30 प्रतिशत वोट मिला था वो अब काफी हद तक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को शिफ्ट हो रहा है। यह तृणमूल के प्रमुख चुनौती है।

नाम न छापने की शर्त पर तृणमूल नेता ने बताया कि हमारी संभावनाएं अब वामपंथी वोट के बदलाव के स्तर पर हैं। हमें उम्मीद है कि 30 से अधिक सीटें मिलेंगी, लेकिन अगर वामपंथी अपने हिस्से का 10 फीसदी से अधिक खो देते हैं, तो हम 25 से भी नीचे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी के नेताओं को यह भी डर है कि कम से कम 15 सीटों पर जहां अल्पसंख्यक एकाग्रता कम है, भाजपा उन सीटों पर तृणमूल से ज्यादा मजबूत स्थिति बना ली है। अगर लेफ्ट का वोट बीजेपी को जाता है तो इससे उनकी बंगाली मध्यम वर्ग के बीच पकड़ और बढ़ेगी।

तृणमूल के मुख्य प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में हमारी पार्टी अपनी स्थिति में सुधार करेगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार को जो हुआ उसके बाद हम भाजपा को पश्चिम बंगाल में बढ़त नहीं लेने देंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल को 34 सीटें मिलीं जबकि बीजेपी ने 42 संसदीय क्षेत्रों में से केवल 2 सीटों पर जीत हासिल की। तृणमूल बंगाल में 2011 से सत्ता में है।

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