इस बार शिमला पर्यटन पर ना जांय।

इस बार शिमला पर्यटन पर ना जांय।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला इन दिनों पानी की किल्लत का सामना कर रहा है।
गर्मी के साथ इलाके में पानी का संकट हर दिन इतना गहरा होता जा रहा है कि लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और टैंकर से पानी लेने के लिए हर गली में हंगामा हो रहा है।

स्थिति ऐसी है कि शिमला के प्रतिष्ठित माल रोड पर पानी के लिए लोगों की लाइन लगनी शुरू हो गई है. कुछ लोगों ने तो रात को मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की कोशिश की।
पानी के लिए शिमला में कई जगहों पर प्रदर्शन हुए, तब जाकर सरकार की नींद टूटी और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को कमान खुद अपने हाथ में लेनी पड़ी.

पर्यटन के लिहाज यह मौसम बेहतर माना जाता है। ऐसे समय में सबसे ज्यादा परेशानी होटल मालिकों को झेलनी पड़ रही है. परेशानी को देखते हुए होटल मालिक अब पर्यटकों से शिमला न आने की अपील कर रहे हैं। धंधा चौपट होने के डर के बावजूद वो पानी की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं।

कई होटलों ने तो बुकिंग लेना ही बंद कर दिया है और कई जगह बुकिंग रद्द कर दी गई है. सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति ख़राब हो गई है और पानी की कमी के कारण इन्हें बंद कर दिया गया है.

उत्तर भारत के होटल और रेस्तरां एसोसिएशन के प्रमुख संजय सूद ने बताया, “होटल मालिक पानी की कमी के कारण पर्यटकों को फिलहाल शिमला न आने की सलाह दे रहे हैं. होटलों को निजी टैंकरों से भी सप्लाई नहीं मिल पा रही है.”

शिमला के माल रोड पर रहने वाली सुनीता देवी कहती हैं, “25 मई के बाद से पानी नहीं आया है. उस दिन भी केवल एक घंटे के लिए ही पानी आया था. चार दिनों से हम यहां-वहां से टैंकर से पानी ला रहे हैं, मालूम नहीं पानी कब तक आएगा.”

वहीं, शिमला में एक दुकान चलाने वाले कृष्ण देव कहते हैं कि पानी के संकट के चलते उन्होंने अपनी पत्नी और दो बच्चों को कांगड़ा भेज दिया है, क्योंकि यहां मई की शुरुआत के बाद ही पानी को लेकर मुश्किल शुरू हो गई थी.

सिंचाई और लोक स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा, “हम हर दिन पानी की उपलब्धता की समीक्षा कर रहे हैं. हालात कुछ दिनों में सामान्य हो जाएंगे. हम कई इलाकों में पानी के टैंकर भेज रहे हैं. लोगों को अब तीन-तीन दिन के अंतर से पानी मिलने लगेगा.”

मंत्री का कहना है कि जल स्त्रोतों के सूखने की वजह से पानी की किल्लत हुई है. “अब हम बचे हुए पानी का इस्तेमाल समझदारी से कर रहे हैं।

कितनी ज़रूरत और कितना मिल रहा है पानी?
शिमला में वर्तमान पानी की ज़रूरत 45 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) है, जबकि शहर को इन दिनों 20 एमएलडी के लगभग ही पानी नसीब हो रहा है जो इस समस्या का मुख्य कारण है।

शिमला और आसपास के लिए पानी के पाँच स्रोत हैं। जिनमें गुम्मा, गिरी, अश्वनी खड्ड, चुरट और सियोग शामिल हैं. इनमें से शिमला के पानी की आपूर्ति का मुख्य स्रोत रही है अश्वनी खड्ड, जिससे सप्लाई बीते दो सालों से बंद है।

इसके दूषित पानी की वजह से दो साल पहले पीलिया फैल गया था, जिससे 30 लोगों की मौत हो गई थी. पानी की कमी का दूसरा कारण है यहां सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी और बारिश नहीं हुई थी।

वैसे शिमला में सर्दियों में बर्फबारी के बाद भी पानी की समस्या रहती है. जबकि गर्मियों में सूखे के चलते और बरसात में सिल्ट के कारण जनता को पूरे साल कम पानी की समस्या से जूझना पडता है।

राजधानी में पानी की आपूर्ति की जिम्मेदारी नगर निगम शिमला की है। जिसकी मेयर इस विकट संकट में जनता को अपने हालात पर छोडकर चीन के सरकारी दौरे पर हैं।

शिमला नगर निगम में लंबे समय तक कांग्रेस ने शासन किया है. यही वजह है कि भाजपा कांग्रेस को ही इस दुर्दशा का दोषी मानती है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती का कहना है कि नगर निगम में कांग्रेस ने लंबे समय तक शासन किया है और इस समस्या के लिए वही जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा, “भाजपा 2017 में पहली बार नगर निगम शिमला में काबिज हुई। सतलज से शिमला के लिए पानी की 400 करोड की योजना केंद्र सरकार को भेजी गई है, हमारी कोशिश रहेगी इसे जल्दी ही पूरा कर लिया जाए.”

जबकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि शिमला में पानी की ऐसी कुव्यवस्था पहली बार देखने को मिली है. “कांग्रेस इतने साल सता में रही लेकिन कभी ऐसे हालात पैदा होने नहीं दिए.”

आरोप प्रत्यारोप के बीच मुख्यमंत्री के साथ दूसरे मंत्रियों को भी शहर के अलग-अलग स्थानों पर जनता को समझाना पड़ रहा है. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर प्रतिदिन पानी की स्थिति को लेकर अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठक कर रहे है।

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