NEET केस मामले में आवाज उठाने वाली अनीता की खुदकुशी मामले पर सुप्रीम कोर्ट का जल्द फैसले से इनकार

खास बाते :-

नीट केस मामले में जल्द सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट का इंकार
नीट केस मामले में जल्द सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट का इंकार

1:-    अनीता ख़ुदकुशी मामले में जल्द सुनवाई                                                पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है

2:-    कोर्ट ने कहा जल्द सुनवाई की जरुरत नहीं

3:-    १२ वीं की टॉपर थी सुनीता

4:-   वकील जीएस मणि ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर
पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है.

तमिलनाडु की अनीता की खुदकुशी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मामले में जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है. मेडिकल दाखिले के लिए होने वाली नीट (NEET) यानी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के खिलाफ आवाज उठाने वाली 17 साल की दलित छात्रा एस अनिता की बुधवार को आत्महत्या के मामले में दाखिल याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई.

                                                    7  सितम्बर को नीट कॉउंसलिंग का आखिरी मौका 

 

दरअसल, वकील जीएस मणि ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि मद्रास हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में पूरे मामले की जांच की जाए. इसके साथ-साथ याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार को आदेश दे कि वह राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखे और कोई भी राजनीतिक पार्टी व अन्य लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन न करें. साथ ही तमिलनाडु राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम को 11 वीं व 12 वीं कक्षा के लिए सीबीएसई के अनुरूप बनाने के आदेश दिए जाएं.

                       नीट परीक्षा के खिलाफ आवाज उठाने वाली अनीता हार गई जिंदगी की लड़ाई 

तमिलनाडु के अरियालुर जिले की रहने वाली छात्रा अनीता नीट परीक्षा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ने वाली दलित स्टूडेंट थी. अनिता 12वीं की टॉपर थीं. बताया जा रहा है कि 17 वर्षीय अनीता ने आत्महत्या इसलिए की है क्योंकि वो 12वीं की टॉपर होने के बाद भी मेडिकल सीट पाने में सफल नहीं हो पाई थी. बता दें कि तमिलनाडु ने इस साल राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (NEET) से राज्य को बाहर रखने के लिए अधिसूचना जारी की थी.

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